
मोक्ष का द्वार है मनुष्य जीवन, सत्संग से मनुष्य हृदय में फैलता है प्रकाश:- पूज्य संत विजयानंद गिरि जी महाराज
बरही के खितौली में दुर्लभ सत्संग का रसपान कर रहे ग्रामीण
कटनी/बरही। आशा, विश्वास और भरोषा छोड़ कर भगवान के सन्मुख होने से ही मानव जीवन का कल्याण है, भगवान से मनुष्य का स्वाभाविक, नित्य, अटूट, स्वतंत्र संबंध है और इसी संबंध को स्वीकार करना है। उक्त अमृतवर्षा पूज्य स्वामी विजयानंद गिरि जी महाराज के मुखारबिंद से बरही के खितौली में आयोजित दुर्लभ सत्संग में हो रही थी। साधकों को सचेत करते हुए महाराजश्री ने समझाया कि मानव शरीर कल्याण के लिए मिला है, परमात्मा का भजन करने के लिए मिला, इसके लिए न तो किसी को साधु बनना है, और नही जंगल जाना है, लौकिक जीवन मे समाज की सेवा करते हुए नित्य परमात्मा का स्मरण करना है।
खितौली में 8 दिसंबर से दुर्लभ सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। हर दिन दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक सत्संग का रसपान करने बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुँच रहे है। शनिवार 14 दिसंबर को इस धार्मिक आध्यात्मिक अनुष्ठान का विश्राम होगा। मानव जीवन में भगवान के प्रति अटूट समर्पण का भाव जागृत कर सत्संग का रसपान करा रहे पूज्य संत विजयानंद गिरि जी महाराज ने सहज शब्दों में साधकों को समझाया की जिस तरह भास्कर भगवान के उदय होने से संसार मे रोशन होता है, ठीक उसी प्रकार सत्संगरूपी प्रकाश मनुष्य के हृदय को रोशन कर देता है, 84 लाख योनियों में मनुष्य जीवन ही है, जो प्रभु का सुमिरन कर अपना कल्याण कर सकता है, यह मानव शरीर मोक्ष का द्वार है, परमात्मा से अटूट प्रेम, उनका नित्य भजन कर सद्चित आनंद की प्राप्ति संभव है।







