
प्रशासन का गड्ढा चूसने लगा खून तो अब पाटने की कवायद
एसडीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने थाना पहुँचे आक्रोशित ग्रामीण
महानदी पुल में खोदे गड्ढे में बाइक सवार के गिरने से बढ़ा आक्रोश
जिंदगी की जंग लड़ रहा घायल बाइक सवार अवधेश, जबलपुर में चल रहा उपचार
कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में पिछले 2 साल से जर्जर बंद महानदी पुल से वाहनों की आवाजाही को रोकने 4 दिन पूर्व पुल खोदे गए विशालकाय गड्ढा खून से लाल होने के बाद अब प्रशासन उसे पाटने की कवायद कर रहा है। खबर है कि8 महानदी पुल दोपहर में पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। बरही, विजयराघवगढ़, कैमोर के साथ कटनी से भी पुलिस बल बुलाया गया। मौके पर एसडीएम महेश मंडलोई, एसडीओपी के पी सिंह, टीआई शैलेन्द्र सिंह यादव समेत अन्य आला-अधिकारी मौजूद है और खुद खोदे गए गड्ढे को पाटने के लिए मलबा आने का इंतजार भी कर रहे है। गौरतलब है कि सोमवार की रात ग्राम डीघी का सराफा कारोबारी अवधेश पिता सुरेश सोनी 30 वर्ष बाइक सहित प्रशासन के इस गड्ढे में समा गया था, जिसे ऑटो में लादकर इटौरा के टीपी पांडेय सहित अन्य ग्रामीणों ने बरही अस्पताल में भर्ती कराया था, जो अब जबलपुर में जिंदगी-मौत के बीच की जंग लड़ रहा है।
ग्रामीण टीपी पांडेय, अम्बिका द्विवेदी आदि ने आरोप लगाया कि महानदी पुल से वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए एसडीएम विजयराघवगढ़ द्वारा गड्ढा नही बल्कि 5 फिट गहरी खाई 4 दिन पूर्व खुदवाई गई थी, जो हादसे का सबब बन रहा है। इन 4 दिन के अंतराल में 4 बाइक सवार उस गड्ढे में गिरकर रक्तरंजित हुए है। सोमवार की रात एक बाइक सवार बरही थाना के ग्राम डीघी निवासी 30 वर्षीय अवधेश पिता स्वर्गीय सुरेश सोनी फिर उस गड्ढे में गिरकर अब जिंदगी की जंग लड़ रहा है। ग्रामीणों ने सवाल किया कि यह कौन सी यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाता है कि खून चूसने के लिए गड्ढा खोद दिया जाए…इंतजाम न करना पड़े।
इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने एसडीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रात में ही बरही थाना पहुँच गए, जहां एसडीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने लगे। हालांकि पुलिस ने उन्हें चलता कर दिया, जिसके बाद बिफरे ग्रामीण रात में ही महानदी पुल में बैठ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम द्वारा खुदवाया गया गड्ढा लोगो का खून चूसने लगा है, क्षेत्र के नेता, सांसद मूकदर्शक बनी हुई है, इन्हें जनता की तकलीफ से कोई वास्ता नही।
रातभर नही सो पाए एसडीएम, मौत के गड्ढे पटवाने करते रहे जतन
खबर है कि हादसे के बाद ग्रामीणों का आक्रोश को देखते हुए और एसडीएम के खिलाफ मामला दर्ज कराने की मांग करने के बाद खुद एसडीएम द्वारा खुदवाए गए गड्ढे को भरने के लिए रात में ही कवायद प्रारम्भ हुई और कुटेश्वर माइंस का मलवा लेकर जैसे ही एक डंपर पाटने पहुँचा, उसे आक्रोशित ग्रामीणों ने रोक लिया और पहले एसडीएम पर कार्यवाई की मांग करने लगे। हालांकि किसी बिपरीत स्थिति निर्मित न होंने पाए इसे देखते हुए मौके पर सुबह पहुँची पुलिस ने उक्त मलबा लोड वाहन वापस भेज दिया।
संकेत बोर्ड तो लगाते
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि कौन से नियम के तहत एसडीएम के यहां मौत की कब्र खुदवाई है, क्या उनकी मानवीय संवेदना मर चुकी है। द
गड्ढा खुदवाने के बाद कम से कम संकेत बोर्ड लगा देते, जिससे यहां से अनजान बाईक सवार उस गड्ढे में गिरने से बच जाए।
रातभर नही सो पाए एसडीएम
पुल से आवाजाही बंद कराने के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर घायल हो रहे बाइक सवारों और बढ़े आक्रोश को सुनकर एसडीएम महेश मंडलोंई रातभर नही सो पाए और रात में ही उसे पाटने के लिए मलबा की व्यवस्था कराने में जुटे रहे।
30 दिन का समय भी गजरा
गौरतलब है कि डेढ़ माह पूर्व महानदी पुल से छोटे वाहनों की आवाजाही कि मांग को लेकर आंदोलन किया गया था, जिसमें प्रशासन ने 30 दिन का वक्त मांगा था, 45 दिन बीतने के बाद भी अब तक किसी भी तरह की राहत नही मिली। ग्रामीणों ने बैरिकेट्स उखाड़ फेक दिया था, वाहन गुजरने लगे थे, जिसे रोकने के लिए कब्रनुमा गड्ढा खोद दिया गया, जो लोगो का खून चूस रहा है।







