
लोक जनसुनवाई में बाउंसरों का क्या था काम!
बरही तहसील के परसवारा, बहिरघटा, ताली रेत खदान का दहशतगर्दी के बीच हो गई जनसुनवाई
बाउंसरों की दहशत से जनसुनवाई में नही पहुँचे ग्रामीण
3 घंटे में 3 खदानों का 2 अप्रैल को कोरम हुआ पूरा
*सुरक्षा के लिहाज से बरही पुलिस के एक दरोगा और एक आरक्षक भी थे मुस्तैद*
कटनी जिले की बरही तहसील क्षेत्र के ग्राम परसवारा, बहिर्घटा और ताली स्थित रेत खदान संचालन के लिए लोक जनसुनवाई का आयोजन 2 अप्रैल को सम्पन्न गया। सुनवाई स्थल पर पहले से ही रेत कंपनी के दर्जनभर बाउंसर तैनात थे…ऐसे में पूरी जनसुनवाई ही सवालों के घेरे में है की आखिर यहां बाउंसरों का क्या काम था। बहरहाल सुबह 9 बजे से 1 बजे तक 3 गांव में पर्यारण स्वीकृति हेतु लोक जन सुनवाई का कोरम पूरा कर लिया गया, भले ही उक्त सुनवाई में ग्रामीण नही पहुँचे और जो पहुँच भी गए थे, वे ज्यादातर कंपनी के वेतनभोगी नजर आ रहे थे। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बरही पुलिस थाना से एक दरोगा और एक आरक्षक मुस्तैद थे। मंच पर एसडीएम महेश मंडलोई, पर्यावरण विभाग कटनी के अधिकारी राजेन्द्र शुक्ला, बरही के नायब तहसीलदार श्री नामदेव सहित राजस्व व पर्यावरण विभाग का महकमा मौजूद था।
बरही तहसील के बहिर्घटा स्थित रेत खदान के खसरा 71, 186, 631 में लीज क्षेत्रफल 16. 150 हेक्टेयर में पर्यावरण स्वीकृति राज्य खनन निगम लिमिटेड के माध्यम से 10 वर्ष के लिए खनन की स्वीकृति दी गई है, जिसमे 154 लोगो को रोजगार देने, 2 लाख 90 हजार 700 घन मीटर सलाना उत्पादन में 2 करोड़ 30 लाख रुपए प्रस्तावित लागत पर पर्यावरण रखरखाव पर 32 लाख 99 हजार पूंजीगत लागत व आवर्ती लागत 8 लाख 48 हजार 500 रुपए सलाना, जबकि गांव के विकास के लिए 4 लाख 60 हजार रुपए कंपनी खर्च करेगी। वही 19 हजार 400 पौधों का वृक्षरोपण पर 32 हजार 400 रुपए प्रस्तावित किया किया गया है।
ग्राम परसवारा स्थित रेत खदान के खसरा नंबर 358 में 15.00 लीज क्षेत्र में 2 लाख 43000 घनमीटर प्रतिवर्ष खनन करने केस प्रस्ताव है।
यह जनसुनवाई मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कटनी द्वारा आयोजित की गई
*रेत खनन से सूख गए कुएं*
उक्त ग्रामों में हुई लोक जनसुनवाई में जो इक्का-दुक्का ग्रामीण पहुँचे हुए थे, उनमें से कुछ का कहना था कि पानी से सीधे रेत की निकासी करने से क्षेत्र का जलस्तर बहुत नीचे चला गया है, अभी से आलम यह है कि कुएं सूख चुके है, जिस पर जनसुनवाई कर रहे अधिकारी ने तर्क दिया कि जहां नदी में जल है वहां उत्खनन नही होगा, यदि ठेकेदार ऐसा करता है तो ठेका निरस्त हो जाएगा….
*स्थानीय जरूरतमंदों को रोजगार की वकालत*
जनसुनवाई के दौरान स्थानीय जरूरतमंदों को रोजगार देने की आवाज उठाई गई, जिस पर सुनवाई कर रहे अधिकारी ने ग्रामीणों को बताया कि यह प्रावधान में है कि ठेका कंपनी को स्थानीय लोगो को रोजगार उपलब्ध कराना होगा…
*कंप्यूटर मिल जाए तो ठीक होगा*
जनसुनवाई कर रहे अधिकारी ने यह भी बताया कि बहिर्घटा में गांव के विकास कार्यो के लिए 4 लाख 60 हजार रूपए खर्च किए जाएंगे, इस राशि से मंदिर, सड़क व मरम्मत के कार्य कराएं जा सकते है, जिस पर ग्रामीण पंकज तिवारी ने कम्प्यूटर की शिक्षा उपलब्ध कराने तो एक ने हो रहे यज्ञ में सहयोग करने की वकालत करने लगे। गाँव के ग्रामीणों का यह भी कहना था कि खदान पहले भी चली है और अब भी चलेगी, उन्हें इससे कोई गुरेज नही है, बस गांव का विकास हो जाए, गरीबों को रोजगार मिल जाए….
*सरपंचों ने भी बनाई दूरी*
जनसुनवाई में बाउंसरों की मौजूदगी के साथ ही ठेका कंपनी के बंदूकधारी प्राइवेट सुरक्षा कमांडों की घेराबंदी में हुई जन सुनवाई में आम ग्रामीणों के अलावा गांव के सरपंचों ने दूरी बना के रखी थी…सुनवाई के दौरान साफतौर पर डर, दहशतगर्दी कस माहौल देखा गया, जिससे ग्रामीणों ने दूरी बना रखी थी, जिससे महज जनसुनवाई बनाम कोरम पूर्ति की कार्यवाही सम्पन्न हुई।







