
रेत के कारोबार में बड़ा खेल! टीपी में कीमत दर्ज नहीं, प्रति ट्रैक्टर ₹3500 वसूली का आरोप
उमरिया से कटनी तक बेखौफ दौड़ रहे रेत से भरे वाहन, ओवरलोडिंग और बिना टीपी परिवहन की शिकायतें; खनिज, पुलिस और आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कटनी/उमरिया। कटनी और उमरिया जिले में रेत के कारोबार को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने रेत की बिक्री में कथित मनमानी, ऑनलाइन ट्रांजिट पास (टीपी) के नाम पर प्रति ट्रैक्टर 3500 रुपये वसूले जाने और रेत से भरे ओवरलोड वाहनों के बेखौफ परिवहन को लेकर चिंता जताई है। आरोप है कि रेत के कारोबार में नियमों की अनदेखी से आम लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं शासन को राजस्व नुकसान होने की आशंका भी है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
टीपी में कीमत दर्ज नहीं, फिर कैसे हो रही वसूली?
ग्रामीणों के मुताबिक, रेत की खरीद और परिवहन के लिए ट्रांजिट पास (टीपी) जारी किया जाता है। आरोप है कि ऑनलाइन टीपी के नाम पर प्रति ट्रैक्टर लगभग 3500 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि टीपी में रेत की कीमत स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होती।
ऐसे में सवाल उठता है कि उपभोक्ताओं से वसूली जा रही राशि में रेत की वास्तविक कीमत, परिवहन शुल्क और अन्य मदों का कितना हिस्सा शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि कीमतों में पारदर्शिता नहीं होने के कारण रेत कारोबार से जुड़े लोग मनमाने दाम वसूल रहे हैं। हालांकि, वसूली की वास्तविक स्थिति और निर्धारित दरों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
आम लोगों की जेब पर पड़ रहा असर
रेत की कीमतों में कथित मनमानी का असर मकान निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आम लोगों को रेत खरीदने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। यदि निर्धारित दरों और वास्तविक वसूली के बीच अंतर है, तो इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि रेत की बिक्री दरों, ऑनलाइन टीपी, रॉयल्टी और परिवहन शुल्क की जांच कराई जाए, ताकि उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों के अनुसार रेत मिल सके और शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका दूर हो।
उमरिया से कटनी तक रेत भरे वाहनों की आवाजाही, हादसों का खतरा
रेत कारोबार को लेकर दूसरा गंभीर सवाल सड़कों पर दौड़ रहे रेत से भरे वाहनों को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उमरिया जिले से कटनी तक रेत से लदे वाहन दिन-रात बेखौफ आवाजाही करते हैं। इनमें से कुछ वाहनों के ओवरलोड होने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, रेत से भरे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यदि वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलते हैं, तो इससे सड़क सुरक्षा के साथ-साथ सड़क की स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
राजस्व-पुलिस कार्यालय के सामने से गुजरते हैं वाहन, जांच पर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजस्व एवं पुलिस कार्यालय के सामने से भी रेत से भरे ओवरलोड वाहन गुजरते हैं, लेकिन उनकी जांच और कार्रवाई को लेकर प्रभावी कदम दिखाई नहीं देते। कुछ वाहनों के बिना टीपी परिवहन किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यदि बिना वैध टीपी के रेत का परिवहन हो रहा है या वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चल रहे हैं, तो यह जांच का गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।
खनिज, पुलिस और आरटीओ विभाग की भूमिका पर सवाल
रेत के परिवहन, वैध दस्तावेजों और वाहनों की निर्धारित भार क्षमता से जुड़े मामलों में खनिज विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने इन विभागों से संयुक्त जांच कराए जाने की मांग की है।
उनका कहना है कि रेत खदानों से लेकर बिक्री और परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। साथ ही, टीपी की वैधता, रॉयल्टी भुगतान, वाहनों के दस्तावेज और भार क्षमता की जांच कर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
कटनी और उमरिया जिले के ग्रामीणों ने प्रशासन से रेत कारोबार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि रेत की कीमतों और टीपी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि आम लोगों से मनमानी वसूली की शिकायतों का समाधान हो सके।।अब बड़ा सवाल यह है कि टीपी के नाम पर कथित वसूली, बिना टीपी परिवहन और ओवरलोड वाहनों की शिकायतों की जांच कब होगी? क्या संबंधित विभाग रेत कारोबार की पूरी प्रक्रिया की जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करेंगे और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करेंगे।







