उमरिया में रेत के कथित अवैध कारोबार ने पकड़ा जोर, माफियाओं के आगे प्रशासन नतमस्तक! बाबा महाकाल रेत ठेका कंपनी पर नियमों की अनदेखी के आरोप, ग्रामीणों को धमकाने का आरोप

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उमरिया में रेत के कथित अवैध कारोबार ने पकड़ा जोर, माफियाओं के आगे प्रशासन नतमस्तक!

बाबा महाकाल रेत ठेका कंपनी पर नियमों की अनदेखी के आरोप, ग्रामीणों को धमकाने का आरोप

उमरिया। जिले में रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाबा महाकाल रेत ठेका कंपनी पर नियमों को ताक पर रखकर नदियों से रेत निकालने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत उत्खनन के नाम पर मनमानी की जा रही है और विरोध करने पर कंपनी के कथित कर्मचारियों द्वारा धमकाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
चपहा गांव में ग्रामीणों को धमकाने का आरोप
ताजा मामला उमरिया जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चपहा से सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, बाबा महाकाल रेत ठेका कंपनी से जुड़े कथित कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है। इस घटनाक्रम से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

बिना टीपी रेत परिवहन का आरोप, राजस्व को नुकसान की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में रेत का उत्खनन और परिवहन मनमाने तरीके से किया जा रहा है। साथ ही, बिना वैध ट्रांजिट परमिट (टीपी) के रेत का परिवहन कर शासन को मिलने वाले राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खदानों के संचालन, उत्खनन की अनुमति और रेत परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए, ताकि नियमों के उल्लंघन की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ठेका कंपनी के कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि रेत ठेका कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए तथा ग्रामीणों को कथित रूप से धमकाने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
रेत उत्खनन से जुड़े इन आरोपों ने जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खदानों का संचालन नियमानुसार हो रहा है, तो प्रशासन को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि अवैध उत्खनन, बिना टीपी परिवहन या ग्रामीणों को धमकाने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या कथित अवैध उत्खनन और बिना टीपी रेत परिवहन पर रोक लगेगी? फिलहाल ग्रामीणों की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: रेत ठेका कंपनी और उसके कथित कर्मचारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।

कुड़ी सलैया सुखदास में शुरू हुआ रेत का अवैध उत्खनन

ग्रामीणों ने बताया कि उमरिया जिले के कुड़ी सलैया सुखदास में रेत का उत्खनन नियम। को ताक में रखकर किया जा रहा है माफिया नदी के बीच धार से रेत निकालकर आसपास एरिया में स्टॉक करके बेच रहे हैं राजस्व  को राजस्व का चूना लगा रहे हैं बावजूद प्रशासन मौन धारण किया है ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग किया है।

 

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