आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा रेत का अवैध कारोबार? नियमों को ताक पर रखकर रेत का उत्खनन और परिवहन, कटनी-उमरिया जिले में प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

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आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा रेत का अवैध कारोबार?

नियमों को ताक पर रखकर रेत का उत्खनन और परिवहन, कटनी-उमरिया जिले में प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

कटनी। कटनी और उमरिया जिले में रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वैध खदानों की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर नदी की मुख्य धारा से रेत निकाली जा रही है। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण कर जेसीबी मशीनों के माध्यम से बड़े वाहनों में लोडिंग और परिवहन किया जा रहा है। इस पूरे मामले में खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खुलेआम चल रहे इस कारोबार के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

वैध खदानों की आड़ में नियमों की अनदेखी?

ग्रामीणों के अनुसार, जिले में संचालित वैध रेत खदानों में भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि नदी की मुख्य धारा के बीच से रेत का उत्खनन कर आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्टॉक किया जाता है। इसके बाद जेसीबी मशीनों से रेत को बड़े वाहनों में लोड कर विभिन्न क्षेत्रों में परिवहन किया जाता है।

बताया जा रहा है कि रेत परिवहन में लगे कई वाहनों के पास आवश्यक दस्तावेज और फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं होने की आशंका है। यदि इन आरोपों की जांच की जाए तो रेत कारोबार में नियमों के उल्लंघन और राजस्व हानि से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी से रेत कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।

कटनी-उमरिया सीमा पर जगह-जगह लगे नाके, निजी फ्लाइंग टीम पर सवाल

रेत के कारोबार को लेकर कटनी और उमरिया जिले की सीमा पर जगह-जगह नाके लगाए जाने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन नाकों पर रेत कारोबार से जुड़े लोगों के गुर्गे कथित तौर पर हथियारों के साथ बैठते हैं और रेत लेकर निकलने वाले वाहनों की जांच करते हैं।

आरोप है कि रात होते ही रेत कारोबार से जुड़ी कथित फ्लाइंग टीमें सक्रिय हो जाती हैं। ये टीमें रेत लेकर निकलने वाले वाहनों को रोकती हैं और कुछ मामलों में उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर देती हैं।

हालांकि, इन नाकों को लगाने की अनुमति किस विभाग ने दी है, इनकी वैधता क्या है और वाहनों की जांच करने का अधिकार किसके पास है, यह जांच का विषय है।

ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल, विवादों की भी चर्चा

ग्रामीणों का कहना है कि रेत कारोबार से जुड़े कथित गुर्गों की गतिविधियों के कारण आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है। पूर्व में भी कई लोगों के साथ विवाद और कहासुनी की घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है।

यदि निजी व्यक्तियों द्वारा हथियारों के साथ वाहनों को रोककर जांच की जा रही है, तो यह गंभीर मामला है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह पूरे घटनाक्रम की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।

खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल

कटनी और उमरिया जिले में रेत के उत्खनन एवं परिवहन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेत का कारोबार नियमों के अनुसार संचालित हो रहा है, तो प्रशासन को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि अवैध उत्खनन, परिवहन, अनधिकृत नाकों और हथियारों के साथ वाहनों की जांच के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसके संरक्षण में रेत का यह कारोबार फल-फूल रहा है? क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई के अभाव में कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं?

फिलहाल, ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने, अनधिकृत नाकों की जांच करने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की ह

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