
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में रेत के बेख़ौफ़ अवैध उत्खनन व परिवहन के खिलाफ क्षेत्र के पंचों-सरपंचों, जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवाज बुलंद की तो धृतराष्ट्र की भूमिका निभा रहे पुलिस-प्रशासन, माइनिंग, राजस्व, वन एवं पर्यावरण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार अमला खामोश रहा, लेकिन मामला माननीय उच्च न्यायलय जबलपुर में दाखिल होते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और गत 22 फरवरी से रेत का अवैध खनन बंद होने से चीख रही नदियों के साथ ही सड़को को फिलहाल सुकून मिला है।
माननीय न्यायालय के निर्देश के बाद प्रशासन की सयुक्त टीम भी गत दिवस पहुँच कर जांच प्रतिवेदन तैयार करने में जुट गई थी, जिस पर आरोप है कि जांच के नाम पर महज कोरम पूरा किया गया है, जबकि अवैध रूप से नदी का छीना बेख़ौफ़ चलनी किया गया।
मामला उमरिया जिले के मानपुर ब्लाक के पड़वार स्थित हलफल, भदार नदी से रेत के अवैध खनन का है। मुड़गुड़ी निवासी अयोध्या प्रसाद प्रजापति की ओर से माननीय उच्च न्यायलय में गत 13 फरवरी को रिट पिटीशन क्रमांक 3803/2024 दायर की गई, जिसमे केंद्र के साथ राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग, राज्य खनिज निगम विभाग के साथ ही उमरिया जिले के कलेक्टर, एसपी, माइनिंग अधिकारी को पार्टी बनाया गया और कहा गया कि रेत के अवैध खनन एवं परिवहन की शिकायत के बाद भी उमरिया जिले का प्रशासन, पुलिस विभाग पूरी तरह से इस अवैध कारोबार की अनदेखी करते हुए किसी भी तरह की कार्यवाई नही कर रहा है। जबकि ठेका कंपनी खनन पड़वार हलफल-भदार नदी में कर रही है और ट्रांजिट पास दूसरी खदान का जारी हो रहा है। ठेका कंपनी ने पंचायत से किसी भी तरह का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नही लिया आरोप है कि रेत ठेका कंपनी बाबा महाकाल मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ट्रांजिट पास इमालिया के नाम से जारी किया जा रहा है, जबकि रेत का खनन मुड़गुड़ी क्षेत्र के पड़वार से बेख़ौफ़ किया जा रहा है।
जीपीएस फोटो, वीडियो बने अवैध खनन का आधार
पिटीशनर अयोध्या प्रसाद प्रजापति द्वारा मौके का अवैध खनन, ओव्हरलोड बेख़ौफ़ परिवहन का जीपीएस फोटो, वीडियो माननीय न्यायालय में पेश किया गया है, जो इस याचिका का मुख्य सबूत होने के साथ ही यह भी बताया गया कि जिले के जिम्मेदार कलेक्टर, एसपी, माइनिंग, राजस्व अधिकारी अवैध उत्खनन की लगातार की गई शिकायत को अनसुना किया गया, जिससे मजबूर होकर न्यायलय की शरण लेनी पड़ी।
एक साथ इस्तीफा की पेशकश
रेत के अवैध खनन को रोकने में नाकाम जिम्मेदार उमरिया जिले के प्रशासन को क्षेत्र के निर्वाचित पंचों-सरपंचों ने एक स्वर में एक साथ इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था, वाबजूद इसके रेत अवैध खनन पर लगाम नही लगी, जिससे व्यथित होने पर न्यायलय की शरण ली गई। अब मामला न्यायलय में होने के बाद फिलहाल अवैध उत्खनन बंद है।
*सयुक्त टीम की जांच पर खानापूर्ति का आरोप*
माननीय उच्च न्यायलय जबलपुर के निर्देश के बाद हुई जाँच के नाम पर संयुक्त टीम द्वारा कोरम पूर्ति करने के आरोप लग रहे है। पिटीशनर का आरोप है कि प्रशासन की सयुक्त टीम नदी तक पहुँची ही नहीं और ना ही मौक़े स्थल खदान देखा, फ़र्जी पंचनामा बनाकर महज खानापूर्ति की गई, ना खदान नापी गई ना उत्खनन एरिया देखा गया जबकि उत्खनन पूर्णतः अवैध हुआ इस बात की पुष्टि नदी की वास्तविक स्थित करती है। खबर है कि 28 फरवरी को सयुक्त जांच रिपोर्ट माननीय न्यायालय में पेश होनी है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।







