
*कटनी/बरही से आनंद सराफ की कलम से नवरात्र विशेषांक*
कटनी जिले का एक ऐसा मंदिर जो जल से घिरा है
एमपी के कटनी से 58 किलोमीटर दूर बरही क्षेत्र के ग्राम कुनिया स्थित महानदी के मुहाने पर माँ काली का प्राचीन मंदिर प्राकृतिक, नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। पहाड़ी में विराजी माँ काली का दिव्य, अलौकिक दरवार में हाजिरी लगाने न क्षेत्रीय बल्कि कटनी, उमरिया, सतना, शहडोल जिले से श्रद्धालु पहुँच कर माथा टेकते है, जिनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।


मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा यहां विकास कार्य भी कराए जा रहे है, इस धाम अब पर्यटन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। मां काली के इस भव्य दरबार में नरावत्र के पावन अवसर में यहा विधिवत पूजन,भजन,कीर्तन का दौर चलता है। दूर-दूर से भक्त पहुँचते है।





यहां के सरपंच ने बनाया था पहुँच मार्ग
मां काली का यह रमणीय दरबार चारो ओर से बाण सागर के भराव क्षेत्र से घिरा हुआ था, नाव से ग्रामीण मंदिर जाते थे, वर्तमान सरपंच तीरथ पटेल के प्रयास से यहां करीब 10 साल पूर्व पहुँच मार्ग का निर्माण हुआ। फिर विकास की जो रफ्तार पकड़ी वह जारी है। मंदिर के पुजारी इंद्रपाल मिश्रा इंदु के संपर्क में आए दिल्ली के एक समाज सेवी ने मां भगवती की कृपा से मंदिर व मंदिर प्रांगण का का जीर्णोद्धार करवाया एवं पहाड़ी के चारों ओर अनेकों नवीन मंदिरों, ऋषियों का निर्माण करवाया जिसमें हनुमान मंदिर,श्री राम दरबार,भैरवनाथ मंदिर,गणेश जी का मंदिर सप्त ऋषि एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग के अलावा शबरी माता का मंदिर एवम विशेष रूप से गौ माता का मंदिर बनवाया मंदिर के चारों ओर परिक्रमा के लिए एक सुगम रास्ता बनवाते हुए अनेक ऋषियों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। मंदिर का सौंदर्य अपने आप में देखने योग्य है। मां भगवती की कृपा से जो व्यक्ति मंदिर दर्शन के लिए आता है तो वह यही का होकर रह जाता है। ग्रामीणों और प्रकृति प्रेमियों ने मंदिर के चारों तरफ वृक्षारोपण करते हुए सौंदर्यता को और भी निखार दिया, जो लोगो को अपनी ओर खींच लेता है।
कुटेश्वर जा रही थी माँ, पहाड़ी में सज गया दरवार
यहां के जानकार व ग्रामीण बताते है कि सैकड़ो वर्ष पूर्व कुटेश्वर गांव के लोग उमरिया जिला के भरेवा से मां की प्रतिमां लेकर कुटेश्वर जा रहे थे। नदी किनारे प्यास लगने के कारण लोग प्रतिमा को रखकर पानी पीने नदी चले गए और वापस आने पर जब प्रतिमा को उठाया तो मां नही उठी जिसके बाद ग्रामीणों ने वही पर उनकी स्थापना कराई, तब से माँ काली का दरबार सजा हुआ है।
*शारदेय एवम चैत्र की नवरात्रि में सुबह 4 बजे से ही भक्तों का ताता मां भगवती को जल चढ़ाने लगा रहता है। ऐसा कहा जाता है माँ भगवती सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती है।







