

बंद महानदी पुल के ऊपर कंधों में लाश
बीमार हुए पति-पत्नी, पति की मौत के बाद पैदल लाश ले जाते लाचार कुटेश्वर गांव के परिजन
डेढ़ साल से नही हो पाया मरम्मत
कटनी। डेढ़ साल से मरम्मत की बाट जोह रहा बंद महानदी पुल के ऊपर से कंधों में शव रखकर पैदल कुटेश्वर गांव जा रहे ग्रामीणों की यह तश्वीर उनकी की लाचारी, बेबसी के साथ सिस्टम की बेरुखी को भी साफ दर्शा रही है। यह तस्वीर मध्यप्रदेश के कटनी जिले के बरही थानाक्षेत्र के बरही मैहर-मार्ग में बंद पड़े छोटी महानदी पुल का है।
बताया गया है कि कुटेश्वर गांव के विश्राम यादव पिता माथुर 65 साल और उनकी पत्नी 60 वर्षीय सखिया बाई यादव की तबियत बिगड़ी। दोनों को पुल से पैदल चलकर फिर इस पार से ऑटो में बैठाकर बरही के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। विश्राम यादव की सांस रास्ते मे ही थम चुकी थी, जबकि पत्नी की तबियत नासाज होने पर बरही अस्पताल से कटनी रेफर किया गया है।
विश्राम की मौत होने के बाद उसके परिजन और ग्रामीण कुटेश्वर गांव पहुचाने के लिए बंद महानदी पुल से कंधों में शव रखकर ले जाने मजबूर थे, परिवार की महिलाएं सिसक कर रो रही थी, ग्रामीण सिस्टम की बेरुखी को कोसते हुए कम से कम बीमारों के लिए एम्बुलेंस व छोटे वाहन की आवाजाही की परमीशन दिलाने की मिन्नत आरजू करते नजर आए।







