
उदासीन संप्रदाय के संस्थापक भगवान श्री श्रीचंद्र देव जी का 531वाँ प्रगटोत्सव पर्व मनाया गया ।
कल्याण सेवा आश्रम में पूजन हवन बाद हुआ विशाल भंडारा
संवाददाता – श्रवण उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में स्थित कल्याण सेवा आश्रम में आज सोमवार 01 सितंबर 2025 को उदासीन संप्रदाय (उदासीन पंथ) के संस्थापक बाबा श्री श्रीचंद्र जी महाराज ( भगवान श्रीचंद्र देव जी ) का 531 वाँ प्रगटोत्सव पर्व मनाया गया , जिनका जन्म भाद्रपद शुक्ल नवमी तिथि 08 सितंबर 1494 को पंजाब के सुल्तानपुर लोधी ( कपूरथला जिला ) दिल्ली सल्तनत अंतर्गत हुआ था ।
पंद्रहवीं सदी के आखिरी दशक में जब धार्मिक कट्टरता , जातीय संकीर्णता और सामाजिक शोषण चरम पर थे तब उदासीन आचार्य जगतगुरू श्रीचंद्र देव जी का जन्म विक्रमी 1551 में पिता श्री गुरुनानक देव जी तथा माता सुलक्षणा जी के गृह पर अवतरित हुये । वे बचपन से ही समाधि में बैठ जाना , सहज चमत्कार से जनमानस ने भगवान का अवतार माना । पिता श्री गुरुनानक देव जी का मार्ग उन्होंने अपनाया और अपना उद्देश्य बताया ।
” चेतहूं नगरी तारहूं गांव , अलख पुरख का सिमरऊ नांव ।”
प्राथमिक और उच्च शिक्षा के बाद उदासीन मत की दीक्षा कश्मीर में गुरु अविनाशी मुनि से प्राप्त की ।
उन्होंने मनुर्भव का संदेश दिया अर्थात मनुष्यता धारण करना,धैर्य,दया,शालीनता,क्षमा,संयम आदि गुणों को अपनाया । जनमानस के अंदर आत्म विश्वास को जगाना और साधनों के अभाव में संपूर्ण राष्ट्र में भ्रमण कर अपने चमत्कार और उपदेशों से सन्मार्ग हेतु प्रेरित किए ।
कल्याण सेवा आश्रम के वर्तमान पुजारी स्वामी नर्मदानंद जी महाराज ने बताया कि आज भाद्रपद शुक्ल नवमी तिथि को भगवान श्री श्रीचंद्र देव जी का प्रगटोत्सव पर्व जन्म दिवस के रूप ने मनाया जाता है । प्रातः पवित्र जल से प्रभु जी को स्नान , नए वस्त्र , चंदन आदि श्रृंगार किया गया । ब्राह्मण पंडित मुकेश पाठक और पंडित संदीप ज्योत्षी ने विधि विधान से भगवन् का पूजन आराधना बाद आरती और हवन किया गया । श्रीचंद्र देव भगवन का आज खास प्रसाद जिसे रोटप्रसाद का भोग लगाया जाता है ।
भगवान के जन्म दिवस उत्सव पर आश्रम में संत , ब्राह्मण ,भक्त आदि पहुंच विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते और सभी को दक्षिणा वितरित कर प्रसन्नता व्यक्त करते ।







